*///सफलता की कहानी///* *खेत तालाब ने खोले आर्थिक समृद्धि के द्वार, सिंचाई और मत्स्य पालन से अशोक की आमदनी में हो रही वृद्धि*

Yogendra Asati
13 Apr 2026
निर्माण

*///सफलता की कहानी///*

*खेत तालाब ने खोले आर्थिक समृद्धि के द्वार, सिंचाई और मत्स्य पालन से अशोक की आमदनी में हो रही वृद्धि*

कटनी (13 अप्रैल)- जनपद पंचायत बहोरीबंद की ग्राम पंचायत लखनवारा के निवासी श्री अशोक जायसवाल के लिए मनरेगा योजना से स्वीकृत खेत तालाब वरदान साबित हुआ है। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर के निर्देश, सतत निगरानी के फलस्वरुप मनरेगा योजना के अंतर्गत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विविध प्रकार के रोजगार मूलक और जल संचयन के कार्य प्रगतिरत होते हुए पूर्णता की ओर है। हितग्राही अशोक जायसवाल बताते हैं कि खेत तालाब निर्माण होने के बाद जल संचय होने से भूजल स्तर बढ़ा है। खेतों में सिंचाई होने से फसलों का उत्पादन और मत्स्य पालन आदि स्थानीय बाजार में विक्रय करने से आय में उत्साह जनक बढ़ोतरी हुई है। वे आर्थिक रूप से सशक्त होने से अपने परिवार का भरण पोषण एवं अन्य खर्च आराम से बिना किसी दिक्कत के कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 26 में मनरेगा योजना से लगभग डेढ़ लाख रुपए स्वीकृत हुए थे जिनमें से लगभग 1,10,000 रुपए खर्च किए जा चुके हैं। श्री जायसवाल बताते हैं कि शासन से आर्थिक सहायता मिलने से उन्हें खेत तालाब बनवाने में आसानी हुई और उत्पादित वस्तुओं की बिक्री से खासा मुनाफा होने से आमदनी में वृद्धि हुई है। खेत तालाब होने से आर्थिक समृद्धि के द्वार खुल चुके हैं।

*खेत तालाब निर्माण से होने वाले फायदे*

जिला पंचायत सीईओ सुश्री कौर ने बताया कि मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत खेत तालाब (Farm Pond) बनवाने से किसानों को सिंचाई के लिए पानी का स्थाई साधन,भूजल स्तर और फसल उत्पादन में वृद्धि, मछली पालन से अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं। यह योजना वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देती है । जिला पंचायत सीईओ आगे कहती हैं कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए बहुत यह योजना बहुत फायदेमंद है। यह बारिश के पानी को जमा करता है, जिससे आसपास के कुओं और बोरवेल का जलस्तर ऊपर उठता है।
अतिरिक्त आय (मछली पालन): किसान सिंचाई के साथ-साथ तालाब में मछली पालन करके भी आय बढ़ा सकते हैं।
फसल उत्पादन में वृद्धि: इससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है, जिससे सूखा या कम बारिश के समय भी फसल सुरक्षित रहती है। रोजगार के अवसर: तालाब निर्माण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को 125 दिनों का रोजगार मिलता है। जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत भी खेत तालाब के कार्य कराए जा रहे हैं।