*रुचि के संघर्ष की कहानी...एक कदम बदला-जिंदगी बदल गई* *राधे कृष्ण स्व सहायता समूह- ट्रैक्टर एजेंसी की सफल उद्यमी*

Yogendra Asati
27 May 2026
अन्‍य

*रुचि के संघर्ष की कहानी...एक कदम बदला-जिंदगी बदल गई*

*राधे कृष्ण स्व सहायता समूह- ट्रैक्टर एजेंसी की सफल उद्यमी*

कटनी (27 मई)- विकासखंड बड़वारा के ग्राम बिजौरी की रहने वाली 37 वर्षीया, स्नातक तक पढ़ी लिखी,रुचि सिंह सेंगर की जीवन यात्रा संघर्ष, साहस, सफलता और अथक परिश्रम की अद्भुत गाथा है। परिवार में पति, सास और ससुर के साथ रहने वाली रूचि के जीवन में एक समय ऐसा था कि घर चलाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता था। परिवार की मुख्य आजीविका कृषि थी किंतु परंपरागत खेती से होने वाली सीमित आय पूरे परिवार का गुजारा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। छोटी-छोटी जरूरत के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। संसाधनों की भारी कमी और जानकारी के अभाव में रुचि सिर्फ घर के काम और खेती में पति की मदद तक सीमित थी। मन में विचार तो आते थे कि कुछ करना चाहिए कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहिए लेकिन पूंजी और मार्गदर्शन के बिना सब सपने ही रह जाते थे।

*जिला पंचायत सीईओ सुश्री कौर की जुबानी*

जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर कहती है कि रुचि सिंह सेंगर की कहानी यह सिद्ध करती है कि स्व सहायता समूह से जुड़ना किसी भी महिला के जीवन को पूरी तरह बदल सकता है। यह केवल आर्थिक परिवर्तन नहीं है-यह एक सामाजिक क्रांति है जो महिलाओं को आत्मनिर्भर, सशक्त और आत्म सम्मानी बनाती है।

*समूह से जुड़ाव-बदलाव की शुरुआत*

एक दिन रुचि ने सुना कि जनपद पंचायत द्वारा महिला स्व सहायता समूह बनाए जाते हैं जिसे गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाती है। इससे उन्हें एक नई उम्मीद जगी। उन्होंने तत्काल जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचकर जानकारियां एकत्र की और निर्णय लिया कि स्वयं एक समूह बनाएंगे। अपने इस संकल्प को पूरा करने के लिए रुचि ने गांव की 10 महिलाओं को एकत्रित कर राधे कृष्ण स्व सहायता समूह की स्थापना की। समूह ने उन्हें अध्यक्ष चुना। समूह से जुड़ने के बाद सबसे पहले₹3000 का ऋण लिया और नियमित बचत की शुरुआत की। यह छोटा सा कदम उनके जीवन परिवर्तन की पहली सीढ़ी साबित हुआ।

*व्यवसाय की उड़ान- ट्रैक्टर एजेंसी*

समूह से जुड़ने के बाद धीरे-धीरे पति अमर सिंह सेंगर और पत्नी ने मिलकर कृषि कार्य में उन्नत तकनीक को अपनाया। कृषि आय में वृद्धि के साथ मन में एक नए विचार आया *क्यों न कुछ नया और बड़ा किया जाए?* इसी सोच के साथ उन्होंने ट्रैक्टर एजेंसी खोलने का दिव्य स्वप्न देखा।
इस स्वप्न को साकार करने में पूंजी की आवश्यकता थी रुचि ने समूह के माध्यम से₹300000 का व्यक्तिगत ऋण प्राप्त किया और उसी से ट्रैक्टर एजेंसी की नींव रखी। आज पति-पत्नी दोनों मिलकर इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक संचालित कर रहे हैं।

*वर्तमान आय और उपलब्धियां*

रुचि बताती है कि माह में वह लगभग 15 से ₹20000 कमा लेती हैं। बैंक ऋण का भुगतान₹40000 चुकाया जा चुका है। नियमित रूप से ब्याज सहित भुगतान जारी है।

*आर्थिक परिवर्तन*

पहले जहां रुचि सिंह सेंगर को छोटी-मोटी जरूरत के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता था वहीं अब वे अपने घर के सभी खर्च स्वयं वहन करती हैं। समूह से जुड़ने के बाद नियमित बचत की आदत से न केवल उनकी वित्तीय स्थिति सुधरी बल्कि आत्म विश्वास में भी वृद्धि हुई। अब वे न केवल सफल व्यवसाई है बल्कि अपने ग्राम की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।