*जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 3600 से अधिक जल संरचनाएं हुई निर्मित*
*गाँव-गांव पानी की एक-एक बूंद को सहेजने का सिलसिला जारी*
*जिला पंचायत सीईओ सुश्री कौर के गंभीर प्रयासों से आने लगे सकारात्मक परिणाम*
कटनी (13 जून) - राज्य सरकार द्वारा चलाए रहे जा रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के नेतृत्व और जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर की सतत निगरानी और कड़े प्रयासों से 19 मार्च से जिले में जल स्तर को सुधारने और पारंपरिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए चलाया जा रहा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ मे जिले ने उत्कृष्ट कार्य किया है। जिला प्रशासन और ग्रामीणों के साझा प्रयासों से अब तक जिले में 3621 जल संरक्षण संबंधी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किए जा चुके हैं, जिससे पानी को सहेजने और उसके संरक्षण व संवर्धन में मदद मिलेगी।
जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों तालाबों का गहरीकरण, कुओं का पुनर्जीवन, खेत तालाब निर्माण, कूप पुनर्भरण और वाटरशेड विकास जैसे कार्य तेजी से जारी हैं। वर्षों से उपेक्षित पड़ी जल संरचनाएं अब फिर से जीवनदायिनी बनने की ओर अग्रसर हैं। जल स्रोतों की साफ-सफाई, अतिक्रमण हटाने और वृक्षारोपण जैसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती दे रहे हैं।
अभियान के तहत भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए अब तक जिले भर में 1356 डगवेल रिचार्ज (कूप पुनर्भरण) करने का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसी प्रकार सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1146 नए खेत तालाबों का निर्माण हो चुका है। खेतों तक पानी की सुचारू पहुंच के लिए 232 सिंचाई अधोसंरचना से जुड़ी परियोजनायें पूरी की गई हैं। जल संकट से निपटने के लिए 272 विशेष जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की गई हैं।
*इन संरचनाओं का हुआ निर्माण*
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक एक अमृत सरोवर बन कर तैयार है, जबकि 11 अमृत सरोवरों में कार्य प्रगति पर है। साथ ही 63 वॉटर स्ट्रक्चर्स की मरम्मत और 76 जगहों पर गैप फिलिंग प्लांटेशन का कार्य भी पूर्ण किया गया है। जल संवर्धन के साथ-साथ ग्रामीण विकास को गति देने के लिए 273 वाटरशेड संबंधी कार्य और मनरेगा व अन्य योजनाओं के समन्वय से 63 अतिरिक्त विकास कार्य भी पूर्णता की सूची में शामिल हो चुके हैं।
*जिला पंचायत सीईओ सुश्री कौर के निर्देशन में हो रहे सार्थक प्रयास*
जिला पंचायत सीईओ सुश्री हरसिमरनप्रीत कौर के कुशल मार्गदर्शन, सतत् निगरानी,सार्थक एवं संयुक्त प्रयासों और बैठकों में सतत समीक्षा की वजह से यह अभियान अब सिर्फ एक शासकीय लक्ष्य न रहकर आमजन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कड़े स्तर की मॉनिटरिंग और मैदानी स्तर पर अधिकारियों-ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के आपसी तालमेल से जिले ने यह मुकाम हासिल किया है। आने वाले दिनों में ये संवारी गई संरचनाएं न केवल पर्यावरण को सहेजेंगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की भी नई जीवनरेखा बनेंगी।
जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 3600 से अधिक जल संरचनाएं हुई निर्मित* *गाँव-गांव पानी की एक-एक बूंद को सहेजने का सिलसिला जारी* *जिला पंचायत सीईओ सुश्री कौर के गंभीर प्रयासों से आने लगे सकारात्मक परिणाम*